lafz 28: आंखें, एक समंदर!

कब तक यू ही पैदल चलते,
आख़िर समंदर में डूबना ही था..

शरारती आंखों ने ऐसा षड्यंत्र रचा,
समर्पण करना हमारा, ज़रूरी सा था..

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