Lafz #15 वक्त और मुसाफ़िर!


जो कभी रोज़ मिलता था,
अब सिर्फ तस्वीरों में नज़र आता है,

उसकी वो मुस्कान और हरकतें,
जो रौनक सी थी, एक आदत सी थी,

क्या आज भी वहा वैसा ही है?
या, हालात का मारा, बदल गया है..


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